डा.प्रशान्त कुमार मनोज, सहायक अतिथि प्राध्यापक

बी.ए.(प्रतिष्ठा), षष्ठ पत्र।मैथिली गद्यकार लोकनिक मध्य बाबू भोला लाल दासक द्वारा मैथिलीक बहुमुखी विकास कयल गेल। जाहि मे हुनक योगदान सर्वोपरि मानल जाइछ। बाबू भोला लाल दास द्वारा रचित निबंध राष्ट्रभाषा ओ मातृभाषा मे एहि दुहुक विस्तृत व्यख्या एवं ओकर महत्व केँ अत्यंत विस्तार सँ चर्चा कएने अछि।             

      भारत एक विशाल राष्ट्र थिक। जाहि मे अनेकों प्रांत जेना बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल देशक पड़ोसी देशक सीमा सँ सटल अछि। ओहि देशक लोकनिक राजभाषा आ राष्ट्रभाषा आओर मातृभाषा आ राष्ट्रभाषा मे कोनहु अन्तर नहि छैक। उत्तर भारत मे हिन्दी, बंगला, मैथिली, पंजाबी आ दक्षिण भारत मे मराठी, मलयालम, तेलुगु  आ कन्नड़ भाषा प्रचलित अछि। प्रत्येक देशक अपन राष्ट्रभाषा  होइछ। भारत मे हिन्दी केँ राष्ट्रभाषा मानल गेल अछि। मुदा हिन्दी आइयो अपन सम्पूर्ण अस्तित्वक लेल संघर्ष करि रहल अछि।  

                     अंग्रेजक द्वारा गुलाब भारत मे अंग्रेजी भाषा राजभाषा छल। जेकरा स्वतंत्रता प्राप्तिक उपरांत अपन भाषा हिन्दी केँ राजभाषाक रूप मे अपनाओल गेल। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी गुजराती छलनि। मुदा ओ हिन्दी केँ राष्ट्रभाषाक लेल हमेशा प्रयत्नशील रहलनि।  

                     देश स्वतंत्र भेलाक उपरांत देशक अपन संविधान बनल। तखन सर्वसम्मति सँ हिन्दी केँ राष्ट्रभाषा घोषित कयल गेल। त्रिभाषा सिद्धांत मे मातृभाषा, राष्ट्रभाषा आ विश्व भाषाक सामंजस्य पर विशेष ध्यान देल गेल।