निबंध संग्रह मे संकलित पीयर आँकुर लेख पर प्रकाश दिअ : By- Dr. Prashant Kumar Manoj

निबंध संग्रह मे संकलित पीयर आँकुर लेख पर प्रकाश दिअ – निबंध संग्रह मे संकलित पीयर आँकुर निबंधक रचयिता श्री ब्रजकिशोर वर्मा मणिपद्म छथि। मैथिली साहित्यिक सजग प्रहरी मणिपद्म जी युग युग सँ हमरा लोकनिक बीच व्याप्त दासत्वक डेंग पर प्रहार कएने छथि। मैथिली साहित्य मे ब्रजकिशोर वर्मा मणिपद्म जीक स्थान महत्त्वपूर्ण अछि। ई कवि, उपन्यासकार, कथाकार आ नाटककारक रुप मे ख्यात छथि। हिनक लिखल संस्मरण आओर वैचारिक निबन्ध सेहो साहित्यिक गौरव थिक। ई मैथिलीक साथ साथ हिन्दी, अंग्रेजी आ बंगला भाषाक सेहो अध्ययन कएने छलाह। साहित्य साधनाक अतिरिक्त ई होमियोपैथिक चिकित्सा कार्य मे लागल रहलाह।
                                 हिनक लिखल उपन्यास आ नाटक मे ‘विद्यापति’, ‘कोब्रागर्ल’, ‘लोरिक विजय’, ‘नैका बनिजारा’, ‘राजा सलहेस’, ‘लवहरि कुशहरि’, ‘राय रणपाल’, ‘फुटपाथ’, ‘दुलरा दयाल’ आ ‘अर्धनारीश्वर’ प्रमुख अछि। ‘कण्ठहार’ आ ‘झुमकी’ नाटक अछि। तत्कालीन पत्रिका सोनामाटी मे ‘कनकी’ आ मिहिर मे बाल उपन्यास ‘भारतीक बिलाड़ि’ प्रकाशित भेल छथि। प्रो.रमानाथक अनुसारे “हिनक कविता मे प्रवाह अछि, सृष्टिक सौंदर्यक दिस दृष्टि अछि, भावक प्रधानता अछि, संगहि संग आदर्श ओ वस्तु स्थितिक मध्य जे विषमता ई देखैत छथि तकर करुण ध्वनि हिनक कविता सँ बहैत अछि।”                         

मणिपद्म जी लोक गाथाक अन्वेषकक साथ बड़ भावुक कवि छथि। हिनक लेखनी मे प्रकृतिक चित्रण बड़ नीक जकाँ रहैछ।       अन्तरालक सौन्दर्यक सोनामाटी मे        गुङआइत –  फेनाइत        झकझक प्रवहमान        काल – सरिताक तटपर         कुसुमित – सुरभित कानन मे         अल्हरैत – मल्हरैत हे हमर मृग – मन!मणिपद्म जी कथाकारक रुप मे सोहनगर भाषा शैली आ मांटि पानिक सुगन्धक लेल प्रसिद्ध छथि। नैका बनिजाराक लेल हिनका साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल अछि।                 पीयर आँकुर मे बहुत दिन सँ राखल एकटा डेङ तर मुरझायल, मरइमान पीयर पीयर घास आ सुन्नर बीजक पीयर आँकुरक तरहे दासताक बेड़ि मे जकड़ल लोकक बड़ सुन्दर चित्रण कएने छथि। डेङ हटएलाक उपरांत जेना पीयर आँकुर मे नव संचार होइछ तहिना दासताक बेड़ि मे जकड़ल लोक केँ स्वतंत्रता मिलला पर नव संचार होयबाक दिस इंगित कएलनि अछि।                  मिथिलाक मांटि पानि मे युग युग सँ साहित्य, कला आ दर्शनक बीज संचित छैक। जहिया कहियो विकासक सुविधा भेटलैक ओ बीज विशाल वृक्ष बनि अयाची, मंडन, वाचस्पति उदयनाचार्य आ विद्यापतिक रुप मे पत्र पुष्प सँ युक्त भेल। प्रतिकूल वातावरणक प्रभाव पड़ला सँ ओहि अमर बीज सभक आँकुर पीयर पड़ि गेलेक आओर ओकर निर्बाध बाढ़ि अवरुद्ध भए गेलैक अछि। विकासक समुचित अवसर भेटय तँ मिथिलाक धरतीक ई आँकुर सभ कवि, दार्शनिक, अभिनेता, लेखक चित्रकार ओ कलाकारक रुप मे प्रस्फुटित भए उठत। एहि सभक पुष्पक मधुर गन्ध संसार भरि मे व्याप्त भए उठत। सीता, गार्गी आ भारतीक परम्परा नष्ट भय गेलैक अछि। सुषुप्त लोकक जाग्रत होयबा मे कनियो काल नहि लगतैक।                    एहि देशक संस्कृतिक जड़ि दर्शनक माँटि मे एतेक गँहीर तक गेल छलैक जे एहू विपन्न स्थिति मे महात्मा गांधी, महाकवि टैगोर, महावैज्ञानिक रमण आ महादार्शनिक राधाकृष्णनक आविर्भाव भए सकलन्हि। सभ सँ पहिने समाज मे ई चेतना चाही जे आलोक, जल आ खादक अभाव मे आँकुर सभ नष्ट भ जायत। उपयुक्त वातावरण भेटने बिना ओकरा सभक विकास नहि भ सकतैक। आँकुर सभक विकासक लेल आवश्यक छैक जे स्थानीय विश्वविद्यालय जाहि मे ओहि ठामक विशेषता सँ युक्त विषय सभ केँ प्रोत्साहन देल जाए। मानव अदभूत आ असाधारण जीव थिक। ओ कतए, कोना आ कखन कोन तरहे अपन विकास करत से कहब कठिन अछि। केरलक नारिकेर कुंज आ मिथिलाक आम्रवन अपन विशेषता के सहज परिणाम थिक। विभिन्न माँटि पानि मे जे स्थानीय विशेषता होइछ तकरा अस्वीकार नहि कयल जा सकैछ।    मणिपद्म जीक बहुमुखी प्रतिभा आ तेजस्वी लेखनक कारणें मैथिली साहित्य हमेशा गौरवान्वित भेल अछि आ होइत रहत।