बी.ए.’प्रतिष्ठा’, तृतीय पत्र : Dr. Prashant Kumar Manoj

डा.प्रशान्त कुमार मनोजअतिथि शिक्षक, मैथिली विभाग,एम एल टी कॉलेज सहरसा।

बी.ए.’प्रतिष्ठा’, तृतीय पत्रसुरेन्द्र झा सुमन रचित प्रतिपदा मे संकलित पहिल कविता ‘कविताक आह्वान’ मे कविक प्रौढ़ विचार, उत्कृष्ट कल्पना, सुक्ष्म चिंतन एवं जनवादी विचार भावना एहि कविता मे अंकित अछि। एहि मे कविक जीवन दर्शन एवं काव्य शास्त्रक मानदंडक सफल अभिव्यक्ति भेल अछि। प्रतिपदा हिनक सर्वाधिक लोकप्रिय रचना अछि।           

          एहि कविता मे ‘आह्वान’ शब्दक विशेष महत्व अछि। कवि एवं हुनक कविताक सार्थकता तखन सिद्ध होइछ जखन कि ओ अपन लेखनी मे अपना युगक पीड़ित, प्रताड़ित एवं असहाय प्राणीक जीवन्त चित्र अंकित करैत छथि। कविताक आरंभ मे प्रकृतिक मनमोहक चित्र प्रस्तुत कएल गेल अछि।      प्रातःकाल वातावरण सुगंधित रहैछ। मलयगिरि सँ आबय वाला हवा उद्यान प्रशन्नता आनि दैत अछि। गाछक डारि पर झुलैत सूगा आ कोइलीक कूक वातावरण के आनंद विभोर कए दैत अछि। एहि कविता मे कवि कृषक आ मजदूर पर विशेष ध्यान दैत कहैत छथि जे हर कोदाड़ि, खुरपीक पूजा कयनिहार लाखक लाख आधा नांगट, भूखल पियासल, अपन देहक शोणित केँ सुखबैत खेत केँ जोतैत कोड़ैत छथि। परिणामस्वरूप धरती पर फसल लहलहा उठैछ। ताहि श्रमिकक धाम गंगाक पवित्र जल थिक। अपन श्रमिक  स्वामीक हेतु साग भात लए कमलाक कछेर पर कविता कामिनी ठाढ़ि रहैत अछि।