बी.ए.(प्रतिष्ठा), पंचम पत्र : Dr. Prashant Kumar Manoj

बी.ए.(प्रतिष्ठा), पंचम पत्र।’पशुपति’ कविताक भावार्थ :-‘पशुपति’ कविताक रचयिता कवि सुरेन्द्र झा ‘सुमन’ जी एहि कविता मे पशुक प्रति स्नेह, सहानुभूति, सद्भावना एवं उदारताक उत्कृष्ट वर्णन कएने छथि। प्रस्तुत कविता मे कविक कहब छैन्हि जे परमात्मा ओहि व्यक्तिक क्रियाकलाप सँ अत्यधिक प्रशन्न होइत अछि। जकरा हृदय मे एहि संसारक समस्त जीवक प्रति परोपकारिताक भावना सदिखन जागृत रहैत अछि।                           

    एहि कविता मे कवि सुरेन्द्र झा ‘सुमन’ जी सुलतानगंज सँ गंगाजल भरि कांवर लए बाबा बैद्यनाथ धाम जाइत शिवभक्त केँ सहानुभूति आ उदारताक वर्णन कएने अछि। भगवान शंकर शिव भक्तक द्वारा कांवर जल सँ अभिषेक कएला सँ बड़ प्रसन्न होइत छैन्हि। एकटा कांवरिया सुलतानगंज सँ गंगाजल लए दुर्गम पहाड़ी मार्ग सँ बैद्यनाथ धाम प्रस्थान कएलक। दुर्गम पहाड़ी मार्ग मे ओ दैखैत छथि जे एकटा मृग पानीक बिना मूर्छित भए छटपटा रहल अछि। ओहि कांवरिया केँ तत्क्षण मूर्छित मृग केँ लेल सेवा भावना जागृत होइत छनि। ओहि मृग केँ जल सँ तृप्त करब अपन परम कर्तव्य समझि ओ कांवरक जल सँ मृग केँ प्यास बुझा तृप्त करि दैत छथि। एहि उदारता एवं परोपकारिताक भावना सँ प्रशन्न भए भगवान शंकर ओहि कांवरिया केँ आशीर्वाद दैत छैन्हि।