Dr. Prashant Kr Manoj, 08.04.2021

गोविन्द दासक रचना मे भक्ति हृदयक दिग्दर्शनक भाव स्पष्ट करु -मैथिल कोकिल अभिनव जयदेवक उत्तर मैथिली साहित्याकाश मे जे नक्षत्र सर्वाधिक प्रकाशमान भेल ताहि मे गोविन्द दास अग्रगण्य रहैथि। ओ मूलतः भक्ति कवि छलाह। प्रमुख रुपें बंगालक वैष्णव संप्रदाय मे हिनक गीतक पूरा प्रचार प्रसार भेल। चैतन्य महाप्रभु हिनक गीत गबैत गबैत भाव विभोर भए मुर्छित भए जाइत छलाह। बंगालक विभिन्न कीर्तन मंडली मे हिनक गीत केँ पूर्ण आदर भेटलैक। मिथिला मे सेहो हिनक राधा कृष्ण सँ संबंधित विभिन्न पद जन समुदाय केँ रसप्लावित कएलक। हिनक राधा कृष्ण संबंधित रचना मे भक्ति भावक सम्यक चित्र भेटैत अछि। जे हिनक भक्त हृदयक परिचय दैत अछि। यद्यपि भाषाक वैशिष्टता हिनक रचना मे भेटैछ। हिनक गीत विद्यापति सादृश्य पद अछि आ शब्द विन्यास आ अलंकारक एहन छटा अन्यत्र भेटब दुर्लभ अछि। जेना -
         रसना रोचक श्रवण विलास
          रचय कापर पद गोविन्द दास।
अपन श्रुति माधुर्य आ ललित पदक हेतु प्रसिद्ध छथि। हिनक अपन पद केँ श्रुति मधुर, ललित, अर्थानुग्राही आ समता सँ युक्त बनयबा मे अनेकों शब्द रचनाकें तोरए पड़लन्हि। अर्थ दूर भए गेलन्हि आ कतेको भाव झांपल रहि गेलन्हि। मुदा अर्थक प्रसाधन हेतु शब्दक विन्यास करब नहि छोड़लन्हि। प्रो.रमानाथ हिनक रचना केंं पसंद करैत छथि। हिनक रचना मे शब्दाडम्बर बिशेष अछि। श्रंगारक बहु विध वर्णन, कल्पनाक उड़ान, प्रतिभाक सभ अंश हिनक काव्य मे भेटत। परन्तु भाषाक प्रसिद्ध प्रौढ़ता सम्भव नहि अछि। ओहि हेतु जे अभ्यास चाही तकर हिनका मे  नहि भेटैछ। हिनक भक्ति परक विभिन्न पद एहि रुपें भेटैछ - नवधा, कुसुम बन्दना, प्रेमक महिमा, नांगर गुरु, मुखचन्द्र, अभिसार साधना, विद्यापति बन्दना, नव सागर, प्रेम वैचित्र्य, विरह हुतास, मदन मोहन। एहि सभ पद मे कोनो ठाम कवि राधाक वर्णन कएलन्हि अछि तँ कोनो ठाम प्रेमक विभिन्न स्वरूप केँ चिन्हित कएलन्हि अछि। ' नवधा' मे कविक लेखनी बाजि उठैछ  - 
"भजह रे मन नन्द नन्दन अभय चसार बिन्द
दुर्लभ मानव जनम सत्संग तरह  संभव सिन्ध।"
                          कुसुम बन्दना मे कवि नायिकाक रुप सौंदर्यक चमत्कृत वर्णन प्रस्तुत कएलनि अछि। वस्तुतः अत्यंत स्वाभाविक पंक्ति दृष्टिगत होईछ। अभिसार साधनक क्रम मे कविक पांति देखबा योग्य अछि -
"कंटक गारि कुसुम सभ - - - - - - माधव तुम अभिसारक लागि।"
गोविन्द दास नायक आ नायिकाक मध्य प्रेम स्वरूप सजीव चित्रण प्रस्तुत कएलन्हि। गोविन्द दास अपन काव्य गुरु विद्यापति केँ मानने छलाह आ हुनक बन्दना करैत छलाह। प्रेम विचित्र शीर्षक मे नायक ओ नायिकाक प्रेमक विचित्रता पर दृष्टिपात कएलनि। गोविन्द दासक समस्त पद केँ देखला पर स्पष्ट होइत अछि जे राधा ओ कृष्णक वर्णन मे श्रृंगारिकताक समावेश रहितो भक्ति भावक प्रधानता रहल अछि।
                              हिनक रचना मे शब्दक सरसता ओ मार्मिक वर्णनक विशुद्धता, अनुप्रासंगिकता, कल्पनाक दृढ़ता ओ प्रौढ़ता एवं भावक गंभीरता भेटैछ।