Maithili – By: Prashant Kumar Manoj

कविवर पण्डित लालदासक रमेश्वरचरित मिथिला रामायण महाकाव्यक रचना अमूल्य निधि थिक। रमेश्वरचरित मिथिला रामायणक रचना करि लालदास अपन विद्वता आ सदाचारक परिचय देलन्हि। मैथिलीक विशिष्ट रामकाव्यक प्रणेता एहि महाकविक जन्म मधुबनी जिलाक खड़ौआ गाम मे भेलन्हि। कविवर लालदास महाराज रमेश्वर सिंहक दरबारक रत्न छलाह।              कविवर लालदास मैथिलीक अतिरिक्त संस्कृत, हिन्दी, उर्दू आओर फारसीक ज्ञाता छलाह। रामायण सहित हिनक सत्रह गोट मैथिली कृति अछि आओर एक गोट हिन्दी कृति अछि। मैथिली कृति मे सांग सप्तशती दुर्गाक टीका, चण्डी चरित अर्थात सप्तशती दुर्गा, स्त्री धर्म शिक्षा, गणेशखण्ड, महेश्वर विनोद अथवा गौरी शंभू विनोद, रमेश्वरचरित मिथिला रामायण, हरितालिका व्रतकथा, वैध्वय भंजनी अर्थात सोमवारी व्रतकथा, विरुदावली, गंगा महात्म्य, जानकी रामायण, श्रीमद्भगवद्गीता, ब्रह्मोत्तर खण्ड, राधाकाण्ड, लक्ष्मीकाण्ड, सावित्री सत्यवान नाटक एवं स्त्रीधर्म शिक्षा। जखन कि हिन्दी मे मिथिला महात्म्य अछि।                                हिनक द्वारा रचित रामायण मे रामक अलौकिकताक प्रसंग अत्यधिक देखल जाइछ। अपन जननीक संगहि अपन मातृभाषा केँ साक्षात लक्ष्मीक रुप मे देखब हिनक व्यापक दृष्टिक परिचायक थिक। जकरा ई रमेश्वरचरित शब्द मे ध्वनित कएने छथि। हिनक रामायण मे वाल्मिकी रामायणक मुख्य आधार रहितो पुराण तथा तंत्रक प्रभाव सेहो अछि। चन्दा झाक मिथिला भाषा रामायण मे मिथिलाक आ मैथिली भाषाक प्रधानता अछि एवं सात काण्ड मे विभक्त अछि। लालदासक रमेश्वरचरित रामायण मे अलौकिकताक प्रधानता अछि एवं आठ काण्ड मे विभक्त अछि। हिनक आठम काण्ड पुष्कर काण्ड मे सहस्रबाहु कथाक संगहि जानकीक शक्तिक प्रधानता देखाओल गेल अछि। हिनक रामायण मे छओ ऋतुक वर्णन केँ संगहि देवी स्तुतिक वर्णन अछि। लालदास रमेश्वरचरित रामायण शाक्त ग्रन्थ मानल जाइछ।                 डा.शैलेन्द्र मोहन झाक अनुसारेंं लालदास रामकथाक उल्लेख मे सीताक महिमाक महत्व दए मिथिला मातृभाषा एवं मातृसमाजक प्रति अविरल श्रद्धा आ भक्तिकेँ अर्पित कएने छथि।                    आचार्य रमानाथ झाक अनुसारें लालदासक रामायणक भाषा सरल, स्पष्ट, स्वच्छ एवं सरल अछि।              रामक सीताक पहिल दर्शनक लेल – “देखि जानकीक मुख कमल, मधुप राम दुहू नयन।विवश मधुर रसपान कर, अति एकाग्र चित चयन।।”                         एहि तरहें कहल जा सकैछ जे लालदास मैथिलीक मणि थिकाह। एहि मे कोनो अतिशयोक्ति नहि।