Study Material – By: Prashant Kumar Manoj

Date: 19-04-2020.

ज्योतिषाचार्य बलदेव मिश्र द्वारा रचित ग्रंथ भारत शिक्षा, रामायण शिक्षा, समाज, छात्र जीवन, संस्कृति, गपशप विवेक आओर कविवर पंडित चन्दा झा में कोनहु न कोनहु रुपें शिक्षा पर विशेष ध्यान देल गेल अछि। वर्तमान समाज मे शिक्षाक की उद्देश्य एवं ओकर स्वरूप हेबाक चाही ताहि पर ज्योतिषाचार्य अपन ज्ञान प्रकाशकक माध्यमे मध्यम मार्ग पर विचार करैत कहलैन्हि जे शिक्षाक अर्थ नीक जीवनक उद्देश्य के जानब आ तदर्थ प्रयत्न करब। मुदा वर्तमान समय मे शिक्षाक उद्देश्य केवल अर्थ उपार्जन भए गेल छल। वर्तमान समय मे ककरहु संतोष नहि भए रहल छैक। ज्योतिषाचार्य अपन ग्रंथ मे लिखने छथि जे शिक्षाक स्वरूप केहेन होएबाक चाही तकर निर्धारण करबा मे समाज के आब सभ परिस्थिति पर बारिकी सँ ध्यान देमय पड़तैक। लकीरक फकीर बनला सँ कार्य नहि तलतैक। ओ कहैत छथि जे मनुष्य जीवन मे रहि निरक्षर रहब एहि मनुष्यक जीवन केँ व्यर्थ करब थिक। समाजक मध्य कोनहुँ पैघ पैघ कार्य केँ जनसमुह  मिलि कए बड़ तत्परता सँ कए सकैत अछि। जनसाधारण सँ पूर्ण होयबाक योग्य कार्य स्वयं अग्रसर भए आन लोकक लेल पथ प्रदर्शन करथि।                     

कोनहुंं समाजक तावत धरि चतुर्दिक विकास नहि भए सकैत अछि जावत धरि ओहि समाजक स्त्रीवर्ग सर्वगुण सम्पन्न सुशिक्षित नहि रहत। स्त्री गृहलक्ष्मी होइत छथि। सभ ठाम इ देखल जाइत अछि जे स्त्री पुरुसक सहधर्मिणी रहि पतिक सेवा तथा हित मे निमग्न रहि प्रशन्नचित रहैत छथि। तेँ कर्तव्यक ज्ञान नीक जकाँ होइछ ओ अन्धकार मे नहि रहैथि। पतंजलि अपन महाभाष्य मे लिखने छथि जे अभिवादन मे स्त्री जकाँ नहि देखाबि तँ व्याकरण पढ़ब आवश्यक अछि। शास्त्र मे कहल गेल छैक जे शस्त्र, वीणा, वाणी, घोड़ा, नर ओ स्त्री जेहेन लोकक संसर्ग मे रहैत अछि तेहने गुण ग्रहण करैत अछि। तेँ विद्वान पंडित मंडन मिश्र सनक पतिक संसर्गक कारणहि भारती विदुषी भेलीह। भारतीय समाज मे स्त्रीक स्थान समाज मे बड़ उच्च आ महत्त्वपूर्ण अछि।                              हमरा लोकनिक समाज मे पिता सँ सौ गुणा अधिक महत्व माता केँ देल गेल छैक। माताक महत्ता केँ सिद्ध करैत ‘मनु’ लिखने छथि जे जाहि घर मे स्त्री प्रसन्न पूर्वक रहैत छैथि ततए देवता लोकनि आनंद सँ रहैत छथि आओर ओहि घर मे सर्वथा आनन्द रहैत अछि। कालीदास जी स्त्री केँ गृहिणी मंत्री, प्रिया सखी कहैत छथि – “गृहिणी सचिव सखी प्रिय शिष्या ललिते विद्यो।”                               ज्योतिषाचार्य बलदेव मिश्रक ‘समाज’ पोथीक अध्ययन अवलोकन एवं अनुशीलन कएला सन्ता देखल जाइछ जे एहि पोथीक माध्यमे लेखक समाजक विभिन्न पहलु फर बड़ विलक्षणताक संग विचार कएलन्हि अछि। हमरा लोकनिक मूल शब्द समाज थिक। जँ समाज अपन लक्ष्य केँ प्राप्त करए तँ देशक स्वतः समुचित विकास होएत। समाजक सेवा देशक सेवा थिक।